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जैसलमेर-बाड़मेर-भिलडी के मध्य 380 किमी की नई लाइन का सर्वेक्षण स्वीकृत- रेल

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  • 10 Feb, 2026
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संपर्क में सुधार लाने के लिए जैसलमेर-बाड़मेर-भिलडी के मध्य 380 किमी की नई लाइन का सर्वेक्षण स्वीकृत- रेल, सूचना और प्रसारण एवं इलेक्ट्रोनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव

राजस्थान में विभिन्न रेल अवसंरचना परियोजनाओं के विकास के लिए वर्ष 2009-14 के मुकाबले 1 फरवरी 2026 को पेश हुए बजट में लगभग 15 गुना 9,960 करोड़ रु. का आवंटन- श्री अश्विनी वैष्णव

प्रविष्टि तिथि: 04 FEB 2026 4:02PM by PIB Jaipur

रेल, सूचना और प्रसारण एवं इलेक्ट्रोनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के जवाब में लिखित जानकारी देते हुए बताया कि जोधपुर-लुनी-समदरी-बाड़मेर (209 कि.मी.) खंड का विद्युतीकरण किया जा चुका है। जोधपुर-लुनी खंड (32 कि.मी.) दोहरी लाइन खंड है। संपर्कता में सुधार लाने के लिए, जोधपुर-बाड़मेर रेल लाइन पर लुनी-समदरी खंड (लुनी-समदरी-भिलडी दोहरीकरण परियोजना (272 कि.मी.) का भाग) के विद्युतीकरण के साथ दोहरीकरण का कार्य शुरू किया जा चुका है। इसके अलावा, इस क्षेत्र में रेल संपर्कता में सुधार लाने के लिए निम्नलिखित सर्वेक्षण स्वीकृत किए गए हैं:

 

(i) जैसलमेर-बाड़मेर-भिलडी नई लाइन (380 कि.मी.)

(ii) बलोत्रा-पचपद्रा नई लाइन (11 कि.मी.)

 

राजस्थान:

हाल के वर्षों में बजट आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। राजस्थान राज्य में पूर्णतः/अंशतः पड़ने वाली अवसंरचना परियोजनाओं और संरक्षा कार्यों के लिए बजट आबंटन निम्नानुसार है:

अवधि

परिव्यय

2009-14

682 करोड़ रु. प्रति वर्ष

2025-26

9,960 करोड़ रु. (लगभग 15 गुना)

 

वर्ष 2009-14 और 2014-25 के दौरान राजस्थान राज्य में पूर्णत:/अंशत: पड़ने वाले नए रेलपथों की कमीशनिंग/बिछाने का ब्यौरा निम्‍नानुसार है:

 

अवधि‍

कमीशन किए गए नए रेलपथ

नए रेलपथ की औसत कमीशनिंग

2009-14

798 कि.मी.

159.60 कि.मी. प्रति वर्ष

2014-25

3,815 कि.मी.

346.82 कि.मी. प्रति वर्ष (2 गुना से अधिक)

 

दिनांक 01.04.2025 की स्थिति के अनुसार, राजस्थान राज्य में पूर्णतः/अंशतः पड़ने वाली 43,918 करोड़ रुपए की लागत वाली कुल 3,409 कि.मी. लंबाई की 28 रेल परियोजनाएँ (13 नई लाइन,   05 आमान परिवर्तन और 10 दोहरीकरण) स्वीकृत की गई हैं, जिनमें से मार्च 2025 तक     1,238 कि.मी. लंबाई को कमीशन किया जा चुका है और 18,954 करोड़ रुपए का व्यय किया गया है। इन कार्यों की स्थिति का सार निम्नानुसार है:-

 

कोटि

परियोजनाओं की संख्या

कुल लंबाई
(कि.मी. में)

कमीशन की गई लंबाई (कि.मी. में)

व्यय (करोड़ रू. में)

नई लाइन

13

981

196

5769

आमान परिवर्तन

5

1252

788

6829

दोहरीकरण/

मल्टीट्रैकिंग

10

1176

254

6357

कुल

28

3,409

1,238

18,954

 

रेल परियोजनाओं का क्षेत्रीय रेल-वार ब्यौरा भारतीय रेल की वेबसाइट पर पब्लिक डोमेन में उपलब्ध है।

हाल ही में राजस्थान राज्‍य में पूर्णत:/अंशत: पड़ने वाली संपन्न की गई कुछ परियोजनाओं का विवरण निम्नानुसार है:

क्रम सं

परियोजना का नाम

नवीनतम लागत

(करोड़ रुपए में)

 

बंगुरग्राम-रास नई लाइन (28 कि.मी.)

175

 

थईयात हमीरा-सोनू नई लाइन (58 कि.मी.)

350

 

सूरतपुरा-श्रीगंगानगर आमान परिवर्तन (241 कि.मी.)

896

 

सादलपुर-बीकानेर एवं रतनगढ़-डेगाना आमान परिवर्तन (438 कि.मी.)

886

 

जयपुर-रींगस-सीकर-चूरू एवं सीकर-लोहारू आमान परिवर्तन (320 कि.मी.)

1105

 

भगत की कोठी-लूनी दोहरीकरण (28 कि.मी.)

128

 

रानी-केशवगंज दोहरीकरण (59 कि.मी.)

290

 

गुड़िया-मारवाड़ और करजोदा-पालनपुर दोहरीकरण (49 कि.मी.)

251

 

रानी-मारवाड़ दोहरीकरण (52 कि.मी.)

346

 

आबू रोड-स्वरूप गंज दोहरीकरण (26 कि.मी.)

195

 

आबू रोड-सरोतरा रोड दोहरीकरण (24 कि.मी.)

152

 

अलवर-बांदीकुई दोहरीकरण (60 कि.मी.)

450

 

अजमेर-बंगुरग्राम दोहरीकरण (48 कि.मी.)

375

 

बांगड़ग्राम-गुड़िया पैच दोहरीकरण (47 कि.मी.)

395

 

डेगाना-राय का बाग दोहरीकरण (146 कि.मी.)

809

 

बीना-कोटा दोहरीकरण (283 कि.मी.)

2476

 

नीमच-चित्तौड़गढ़ दोहरीकरण (56 कि.मी.)

560

 

दौसा-गंगापुर सिटी दोहरीकरण (93 कि.मी.)

950

 

फुलेरा-डेगाना दोहरीकरण (108 कि.मी.)

702

 

चूरू-रतनगढ़ दोहरीकरण (43 कि.मी.)

423

 

राजस्थान राज्य में पूर्णतः/अंशतः पड़ने वाली शुरु की गयी कुछ मुख्य परियोजनाओं का विवरण निम्नानुसार है:

 

क्रम सं

परियोजना का नाम

लागत

(करोड़ रू में)

1.

नीमच-बड़ी सादड़ी नई लाइन (48 कि.मी.)

495

2.

तरंगा हिल-आबू रोड नई लाइन (116 कि.मी.)

2798

3.

रामगंजमंडी-भोपाल नई लाइन (277 कि.मी.)

5073

4.

पुष्कर-मेड़ता नई लाइन (51 कि.मी.)

800

5.

रींगस-खाटू श्याम जी नई लाइन (17 कि.मी.)

254

6.

मेड़ता सिटी-रास नई लाइन और मेड़ता रोड स्टेशन पर बाई पास       (56 कि.मी.)

947

7.

कोटा तक विस्तार के साथ ग्वालियर-श्योपुरकलां आमान परिवर्तन     (284 कि.मी.)

2913

8.

गंगापुर सिटी तक विस्तार के साथ धौलपुर-सिरमुथरा आमान परिवर्तन (145 कि.मी.)

747

9.

मावली-देवगढ़ मदारिया गेज परिवर्तन (83 कि.मी.)

969

10

मथुरा-झांसी तीसरी लाइन (274 कि.मी.)

5924

11

आगरा किला-बांदीकुई दोहरीकरण (150 कि.मी.)

988

12

सवाईमाधोपुर-जयपुर दोहरीकरण (131 कि.मी.)

1204

13

चूरू-सादुलपुर एवं लूनी-भीलड़ी दोहरीकरण (330 कि.मी.)

3554

14

अजमेर-चंदेरिया दोहरीकरण (178 कि.मी.)

1635

15

सवाईमाधोपुर में बाई पास लाइन (14 कि.मी.)

304

16

रेवाडी-खाटूवास दोहरीकरण (28 कि.मी.)

352

17.

खाटूवास-नारनौल दोहरीकरण (24 कि.मी.)

313

18.

मारवाड़ में बाई पास लाइन (4 कि.मी.)

71

19.

चुरू में बाई पास लाइन (5 कि.मी.)

63

20.

समदरी में बाई पास लाइन (1 कि.मी.)

26

21.

रामदेवरा-पोखरन नई लाइन (13 कि.मी.)

189

22.

लालगढ़-बीकानेर पूर्व केबिन दोहरीकरण (11 कि.मी.)

279

 

पिछले तीन वर्षों 2022-23, 2023-24, 2024-25 और चालू वित्त वर्ष 2025-26 में, राजस्थान राज्य में पूर्णतः/अंशतः पड़ने वाली कुल 5,666 कि.मी. लंबाई की कुल 59 सर्वेक्षणों (25 नई लाइन और 34 दोहरीकरण) के सर्वेक्षण को मंजूरी दी गई है।

 

 

किसी भी रेल परियोजना की मंजूरी कई मानदंडों/कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • अनुमानित यातायात पूर्वानुमान और प्रस्तावित मार्ग की लाभप्रदता
  • परियोजना द्वारा प्रदान की गई पहली और अंतिम स्थान पहुंच संपर्कता
  • अनुपलब्ध कड़ियों को जोड़ना और अतिरिक्त मार्ग प्रदान करना
  • संकुलित/संतृप्त लाइनों का विस्तार
  • राज्य सरकारों/केंद्रीय मंत्रालयों/जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाई गईं मांगें
  • रेलवे की अपनी परिचालनिक आवश्यकताएँ
  • सामाजिक-आर्थिक महत्व
  • निधियों की समग्र उपलब्धता

 

रेल परियोजना का पूरा होना विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • राज्य सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण
  • वन संबंधी मंजूरी
  • अतिलंघनकारी जनोपयोगी सुविधाओं का स्थानांतरण
  • विभिन्न प्राधिकरणों से सांविधिक मंजूरी
  • क्षेत्र की भूवैज्ञानिक और स्थलाकृतिक स्थितियां,
  • परियोजना के क्षेत्र में कानून और व्यवस्था की स्थिति
  • परियोजना स्थल विशेष के लिए एक वर्ष में कार्य के महीनों की संख्या आदि।

 

ये सभी कारक परियोजना/परियोजनाओं के समापन समय और लागत को प्रभावित करते हैं।

 

रेल अवसंरचना परियोजनाएं क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को सक्षम बनाती हैं, जिसमें शामिल हैं:

• देश के अन्य हिस्सों के साथ क्षेत्र का बेहतर एकीकरण

• माल और सेवाओं की त्वरित आवाजाही

• लॉजिस्टिक दक्षता में सुधार

• लाइन क्षमता में वृद्धि

• क्षेत्र के लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों में वृद्धि

• परिचालनिक बाधाओं में कमी

  • पर्यटन उद्योग का विकास और क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि।
     

भारतीय रेल पर जोधपुर-बारमेड़ रेल लाइन सहित रेलपथ अवसंरचना का उन्नयन और सुधार सतत और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। इसके एक हिस्से के रूप में, जोधपुर–लूनी और      लूनी–बारमेड़ खंडों में अनुमत गति मार्च 2016 और मार्च 2024 में क्रमशः 110 किमी/घंटा बढ़ा दी गई है। भारतीय रेल द्वारा रेल लाइन को उन्नत करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा रहे हैं:

i.   प्राथमिक रेलपथ नवीकरण करते समय 60 कि.ग्रा. की आधुनिक रेलपथ संरचना, 90 अल्टीमेट टेन्सिल स्ट्रेंथ की पटरियां, लोचदार बंधन वाले चौड़े और भारी प्रीस्ट्रेस्ड कंक्रीट स्लीपर, पीएससी स्लीपरों पर फैनशेप्ड लेआउट टर्नआउट, गर्डर पुलों पर स्टील   चैनल/एच-बीम स्लीपर्स का उपयोग किया जाता है।

ii   टर्नआउट नवीनीकरण कार्यों में थिक वेब स्विच और वेल्ड करने योग्य सीएमएस क्रॉसिंग का उपयोग।

iii. ज्वाइंटों की वेल्डिंग से बचने के लिए 260 मीटर लंबे रेल पैनलों की आपूर्ति को बढ़ाना ताकि संरक्षा बेहतर हो।

iv. पूर्व में उपयोग किए जाने वाले पारंपरिक/बेहतर एसईजे के स्थान पर थिक वेब स्विच एक्सपैंशन ज्वाइंट्स का उपयोग किया जा रहा है।

v. पटरियों के लिए बेहतर वेल्डिंग तकनीक अर्थात फ्लैश बट वेल्डिंग को अपनाना।

vi. रेलपथ अनुरक्षण के लिए उच्च आउटपुट प्लेन टैम्पर और पॉइंटों एवं क्रॉसिंग टैम्पर्स का उपयोग करते हुए मशीनीकृत प्रणाली को अपनाना, ताकि रेलपथ की बेहतर अनुरक्षण और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।

vii.   परिसंपत्ति विश्वसनीयता में और सुधार लाने के लिए रेल ग्राइंडिंग मशीनों सहित अत्याधुनिक आधुनिक मशीनों की तैनाती।

viii.   पीक्यूआरएस, टीआरटी, टी-28 आदि जैसी रेलपथ मशीनों के उपयोग के माध्यम से रेलपथ बिछाने की गतिविधियों का यांत्रिकीकरण।

ix.    समपारों पर संरक्षा बढ़ाने के लिए समपारों की इंटरलॉकिंग।

x.    रेल और वेल्ड के परीक्षण के लिए उन्नत फेज़्ड ऐरे तकनीक का उपयोग।

xi.    इष्टतम अनुरक्षण आवश्यकताओं का पता लगाने के लिए व्यापक स्थिति मूल्यांकन हेतु एकीकृत रेलपथ निगरानी प्रणाली और दोलन निगरानी प्रणाली की तैनाती।

xii.   यार्डों में रेलपथ मापदंडों की निरंतर रिकॉर्डिंग के लिए पोर्टेबल रेलपथ मापक ट्रॉली को अपनाना।

xiii.   सटीक अनुरक्षण इनपुट प्राप्त करने के लिए विभिन्न स्रोतों से प्राप्त रेलपथ निरीक्षण रिकॉर्ड के एकीकरण और डेटा विश्लेषण के लिए वेब सक्षम रेलपथ प्रबंधन प्रणाली का उपयोग करना।

 

2021 में गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल नीति आरंभ होने के बाद, देशभर में पहले ही 124 मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल कमीशन किए जा चुके हैं। अब तक, राजस्थान राज्य में नागौर, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, जैसलमेर, जोधपुर, बारां और भीलवाड़ा जिले में 07 मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल चालू किए जा चुके हैं।


(रिलीज़ आईडी: 2223120) आगंतुक पटल : 19

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